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Home»अन्य»मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के विभागों के लिए 10 हजार 617 करोड़ रुपए से अधिक की अनुदान मांगें पारित.
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मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के विभागों के लिए 10 हजार 617 करोड़ रुपए से अधिक की अनुदान मांगें पारित.

satysanwad2023@gmail.comBy satysanwad2023@gmail.com17.03.2026No Comments10 Mins Read
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रायपुर, 17 मार्च 2026/ मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के विभागों से संबंधित 10 हजार 617 करोड़ 73 लाख 49 हजार रूपए की अनुदान मांगे विधानसभा में पारित की गई। इसमें सामान्य प्रशासन विभाग के लिए 612 करोड़ 29 लाख 20 हजार रूपए, सामान्य प्रशासन विभाग से संबंधित अन्य व्यय 30 करोड़ 92 लाख रूपए, जल संसाधन विभाग के लिए 3 हजार 105 करोड़ 11 लाख 80 हजार रूपए, खनिज साधन विभाग से संबंधित व्यय 1145 करोड़ 89 लाख 99 हजार रूपए, विमानन विभाग से संबंधित व्यय 314 करोड़ 99 लाख 90 हजार रूपए, इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी विभाग 416 करोड़ 99 लाख 99 हजार रूपए, सुशासन एवं अभिसरण विभाग से संबंधित व्यय 77 करोड़ रूपए, जनसम्पर्क विभाग से संबंधित व्यय 469 करोड़ 99 लाख रूपए, ऊर्जा विभाग से संबंधित व्यय 4236 करोड़ 01 लाख 61 हजार रूपए, जिला परियोजनाओं से संबंधित व्यय 208 करोड़ 50 लाख रूपए शामिल हैं।

मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने अनुदान मांगों की चर्चा के जवाब में कहा कि पिछले दो वर्षों से राज्य सरकार संकल्पित भाव से छत्तीसगढ़ महतारी की सेवा में जुटी है और विकसित छत्तीसगढ़ की दिशा में यात्रा प्रारंभ हो चुकी है। उन्होंने कहा कि इस लक्ष्य को साकार करने में बजट प्रबंधन की सबसे महत्वपूर्ण भूमिका है।

मुख्यमंत्री ने विधानसभा में अपने विभागों से संबंधित अनुदान मांगों पर चर्चा के दौरान कहा कि पहले दो बजटों की थीम ‘ज्ञान’ और ‘गति’ थी, जबकि इस बार बजट की थीम ‘संकल्प’ रखी गई है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने भ्रष्टाचार के प्रति जीरो टॉलरेंस और डिजिटल गवर्नेंस की नीति अपनाकर व्यवस्थागत लिकेज समाप्त किए हैं, जिसके कारण आम जनता की गाढ़ी कमाई का पैसा अब सीधे जनकल्याण में खर्च हो रहा है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि पूर्ववर्ती सरकार में आबकारी विभाग का राजस्व 5 हजार 110 करोड़ रुपए था, जो वर्तमान सरकार में बढ़कर 11 हजार करोड़ रुपए अनुमानित है। यह अंतर फर्जीवाड़े पर रोक लगने के कारण आया है।

मुख्यमंत्री श्री साय ने नक्सलवाद के विरुद्ध चल रहे अभियान को लोकतंत्र की बड़ी जीत बताते हुए कहा कि राज्य सरकार ने माओवादी आतंकवाद के अंत का लक्ष्य तय कर उसी दिशा में प्रभावी कार्य किया है। उन्होंने कहा कि बड़ी संख्या में नक्सलियों ने आत्मसमर्पण कर लोकतंत्र और संविधान पर विश्वास जताया है। उन्होंने इसे लोकतंत्र के लिए उत्सव का क्षण बताया और कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी एवं केंद्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह के मार्गदर्शन, जवानों की वीरता और प्रदेशवासियों के विश्वास से राज्य माओवादी हिंसा के अंधकार से बाहर निकल रहा है। अब नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में प्रशासनिक तंत्र को मजबूत कर शांति, पुनर्निर्माण और समग्र विकास के लक्ष्य को साकार किया जा रहा है।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि प्रदेश के आर्थिक विकास और रोजगार सृजन में खनिज राजस्व की अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका है। उन्होंने बताया कि वर्ष 2021-22 में 12 हजार 305 करोड़ रुपए रहा वहीं वर्ष 2024-25 में खनिज राजस्व बढ़कर 14 हजार 592 करोड़ रुपए हो गया है, जो राज्य के सकल घरेलू उत्पाद का 11 प्रतिशत है। वित्तीय वर्ष 2025-26 के अंत तक 17 हजार करोड़ रुपए राजस्व प्राप्ति का अनुमान है। उन्होंने कहा कि इस अतिरिक्त राजस्व का उपयोग किसानों, माताओं-बहनों और आम नागरिकों के लिए जनकल्याणकारी योजनाओं में किया जा रहा है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि डीएमएफ को पुनः पारदर्शी बनाते हुए दो वर्षों में 4 हजार करोड़ रुपए से अधिक की राशि प्राप्त हुई और 19 हजार से अधिक कार्य स्वीकृत किए गए। डीएमएफ कार्यों का सोशल ऑडिट भी कराया जा रहा है तथा शिकायत निवारण तंत्र विकसित किया गया है। खनिज ब्लॉकों की नीलामी प्रक्रिया को भी गति दी गई है और अब तक 62 ब्लॉकों की सफल नीलामी हो चुकी है। उन्होंने कहा कि रेयर अर्थ, क्रिटिकल और स्ट्रैटजिक खनिजों के अन्वेषण के लिए प्रतिष्ठित तकनीकी संस्थानों से एमओयू किए गए हैं, जिससे क्लीन एनर्जी और नए निवेश के अवसर बढ़ेंगे। उन्होंने स्पष्ट किया कि सुव्यवस्थित खनन के साथ पर्यावरण संतुलन बनाए रखना सरकार की सर्वाेच्च प्राथमिकता है। राज्य के कुल वन क्षेत्र के मात्र 0.96 प्रतिशत क्षेत्र में खनिज रियायतें स्वीकृत हैं और केवल 0.24 प्रतिशत वन क्षेत्र में ही खनन कार्य की अनुमति दी गई है। उन्होंने कहा कि खनन कार्यों के एवज में बड़े पैमाने पर पौधारोपण किया गया है और ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान के तहत दो वर्षों में करीब 7 करोड़ पौधे लगाए गए हैं।

भारतीय वन अनुसंधान संस्थान, देहरादून की रिपोर्ट का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ में वन एवं वृक्ष आवरण में 683 वर्ग किलोमीटर की वृद्धि दर्ज की गई है। उन्होंने यह भी बताया कि खनिज विभाग में पारदर्शिता के लिए ‘खनिज ऑनलाइन 2.0’ पोर्टल तथा डीएमएफ पोर्टल 2.0 लागू किया गया है। आम जनता को रियायती दरों पर रेत उपलब्ध कराने और माफिया पर अंकुश लगाने के लिए छत्तीसगढ़ गौण खनिज साधारण रेत नियम 2025 लागू किए गए हैं तथा रेत की ई-नीलामी शुरू की गई है।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि विकसित भारत और विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण में प्रदेश एक प्रमुख ऊर्जा प्रदाता के रूप में अपनी अग्रणी भूमिका निभाने के लिए पूरी तरह तैयार है। उन्होंने कहा कि प्रदेश के पावर प्लांट्स की कुल विद्युत क्षमता 30 हजार मेगावाट है, जिसमें ताप विद्युत संयंत्रों की क्षमता 24 हजार मेगावाट है। राज्य की विद्युत उत्पादन क्षमता और प्लांट लोड फैक्टर देश के अग्रणी राज्यों में है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार ऊर्जा आत्मनिर्भरता की दिशा में निरंतर नए कीर्तिमान स्थापित कर रही है। एनर्जी समिट के माध्यम से लगभग साढ़े तीन लाख करोड़ रुपए के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं और 32 हजार मेगावाट क्षमता की परियोजनाओं के लिए विभिन्न संस्थाओं से एमओयू किए गए हैं। उन्होंने बताया कि कोरबा पश्चिम में 660-660 मेगावाट की दो सुपर क्रिटिकल इकाइयों का काम प्रगति पर है तथा 8300 मेगावाट क्षमता की पम्प स्टोरेज जल विद्युत परियोजनाओं के लिए 6 स्थलों का चिन्हांकन किया गया है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि आम उपभोक्ताओं को रियायती दरों पर बिजली की सतत आपूर्ति सरकार की सर्वाेच्च प्राथमिकता है। इसके लिए बीपीएल परिवारों को 30 यूनिट तक निःशुल्क बिजली देने हेतु 354 करोड़ रुपए, मुख्यमंत्री ऊर्जा राहत जन अभियान के तहत 42 लाख घरेलू उपभोक्ताओं को 400 यूनिट तक की खपत पर राहत देने के लिए 800 करोड़ रुपए, प्रधानमंत्री सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना से जुड़े राज्य अनुदान के लिए 400 करोड़ रुपए और डॉ. खूबचंद बघेल किसान विद्युत सहायता योजना के तहत 8 लाख 83 हजार कृषि पंप उपभोक्ताओं को सब्सिडी देने के लिए 5 हजार 500 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार के अनुदान के कारण सोलर प्लांट्स की संख्या में तेजी से वृद्धि हुई है और उपभोक्ता अब केवल बिजली उपभोक्ता नहीं, बल्कि बिजली उत्पादक भी बन रहे हैं। मुख्यमंत्री ने प्रदेशवासियों से प्रधानमंत्री सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना का अधिकाधिक लाभ उठाने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में भी विकास का उजाला पहुंच रहा है और नियद नेल्ला नार योजना के तहत 158 गांवों को शतप्रतिशत विद्युतीकृत किया जा चुका है।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि सरकार ने दो वर्षों में 11 हजार 107 करोड़ रुपए की सिंचाई परियोजनाएं स्वीकृत की हैं और 25 हजार हेक्टेयर सिंचाई क्षमता का सृजन किया गया है। बंद पड़ी सिंचाई योजनाओं को अटल सिंचाई योजना के माध्यम से फिर से शुरू किया गया है। 115 परियोजनाओं के पूर्ण होने से 76 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई सुविधाओं का विस्तार होगा। इस बार बजट में 4 हजार 400 करोड़ रुपए से अधिक राशि नई सिंचाई योजनाओं और उनके अनुरक्षण के लिए रखी गई है। उन्होंने कहा कि इस बार के बजट में शामिल योजनाओं से 1 लाख 60 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई प्रस्तावित है। बस्तर की जीवनदायिनी इंद्रावती नदी की संभावनाओं का उल्लेख करते हुए उन्होंने मटनार और देऊरगांव में बैराज तथा 68 किलोमीटर नहर निर्माण का प्रावधान बताया, जिससे 32 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई सुविधा विकसित होगी। उन्होंने कहा कि ‘पर ड्रॉप मोर क्रॉप’ के मंत्र के अनुरूप दाबयुक्त सिंचाई प्रणाली को अपनाया जा रहा है और जल सूचना विज्ञान केंद्र स्थापित कर जल प्रबंधन को वैज्ञानिक आधार दिया जा रहा है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि मंत्रालय से लेकर मैदानी अमले तक कार्य संस्कृति में बदलाव स्पष्ट दिखाई दे रहा है। बायोमेट्रिक अटेंडेंस, ई-ऑफिस, ई-एचआरएमएस और स्पैरो जैसी व्यवस्थाओं ने शासन को अधिक जवाबदेह, त्वरित और पारदर्शी बनाया है। उन्होंने बताया कि 50 हजार से अधिक अधिकारी-कर्मचारी ई-ऑफिस में और 65 हजार से अधिक कर्मचारी ई-एचआरएमएस प्रणाली में ऑनबोर्ड हो चुके हैं। आई-गॉट कर्मयोगी के माध्यम से 6 लाख कर्मचारियों के प्रशिक्षण की कार्ययोजना पर काम हो रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि ट्रेनिंग और टेक्नोलॉजी के जरिए प्रशासनिक तंत्र को ट्रांसफॉर्म किया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि सुशासन की दिशा में राज्य सरकार ने सुशासन एवं अभिसरण विभाग की स्थापना की है। मुख्यमंत्री हेल्पलाइन को और प्रभावी बनाने, अटल मॉनिटरिंग पोर्टल से योजनाओं की सटीक निगरानी करने, ई-डिस्ट्रिक्ट पोर्टल के माध्यम से सेवाएं उपलब्ध कराने तथा नई पीढ़ी के उत्कृष्ट लोकप्रशासक तैयार करने के लिए मुख्यमंत्री सुशासन फेलोशिप जैसी पहलें की जा रही हैं। उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री हेल्पलाइन के लिए 22 करोड़ रुपए, अटल मॉनिटरिंग पोर्टल के लिए 5 करोड़ रुपए तथा मुख्यमंत्री सुशासन फेलोशिप के लिए 8 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि आज का युग आईटी और एआई का है और छत्तीसगढ़ इस डिजिटल क्रांति में अग्रणी बने, इसके लिए 417 करोड़ रुपए का बजट प्रावधान किया गया है। मुख्यमंत्री एआई मिशन के लिए 100 करोड़ रुपए की राशि रखी गई है, जिसके माध्यम से उच्च शिक्षण संस्थानों, आईटीआई और पॉलीटेक्निक में एआई डेटा लैब्स और एआई सेंटर ऑफ एक्सीलेंस स्थापित किए जाएंगे। उन्होंने कहा कि इससे युवा पीढ़ी को नई तकनीक से जुड़ने का अवसर मिलेगा और शासकीय सेवाएं भी अधिक सरल और प्रभावी होंगी। डिजिटल कनेक्टिविटी का उल्लेख करते हुए उन्होंने बताया कि दो वर्षों में 936 मोबाइल टावर स्वीकृत हुए हैं और 751 टावर ऑन एयर हो चुके हैं। भारत नेट परियोजना के तहत ग्राम पंचायतों में हाईस्पीड इंटरनेट कनेक्टिविटी के लिए 3900 करोड़ रुपए की स्वीकृति मिली है। स्टार्टअप को प्रोत्साहन देने के लिए 36 आईएनसी-सीजी इन्क्यूबेशन सेंटर स्थापित करने का निर्णय भी लिया गया है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि विकसित छत्तीसगढ़ की उड़ान को नई ऊंचाई देने के लिए राज्य सरकार विमानन अधोसंरचना का विस्तार कर रही है। बिलासपुर एयरपोर्ट के 3सी-आईएफआर अपग्रेडेशन से अब वहां नाइट लैंडिंग और चौबीस घंटे विमान सेवाओं का संचालन संभव होगा। इंटरनेशनल कार्गाे टर्मिनल के लिए एमओयू किया गया है, जिससे कारोबारियों को बड़ी सुविधा मिलेगी। रायपुर, बिलासपुर, अंबिकापुर और जगदलपुर एयरपोर्ट में सुविधाओं का विस्तार किया जा रहा है। सीजी वायु योजना के माध्यम से बिलासपुर, जगदलपुर और अंबिकापुर से हवाई सेवाओं का विस्तार होगा, जिसके लिए 30 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है। रायगढ़ और कोरबा की हवाई पट्टियों के उन्नयन पर भी सरकार का विशेष फोकस है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार विकास के साथ सांस्कृतिक प्रगति की भी पक्षधर है। पत्रकारों के लिए एक्सपोजर विजिट के माध्यम से उन्हें देश के विभिन्न राज्यों में अध्ययन भ्रमण का अवसर दिया गया, जिसमें दूरस्थ क्षेत्रों और महिला पत्रकारों को भी शामिल किया गया। उन्होंने कहा कि रायपुर साहित्य उत्सव का आयोजन राज्य की सांस्कृतिक चेतना को नई ऊर्जा देता है और इस बार भी इसके लिए बजट प्रावधान किया गया है। साथ ही प्रवासी छत्तीसगढ़िया सम्मेलन आयोजित करने का निर्णय भी लिया गया है, जिससे प्रदेश के बाहर अपनी पहचान बनाने वाले छत्तीसगढ़िया लोगों के अनुभवों से नई पीढ़ी को प्रेरणा मिलेगी।

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